दिल्ली के रामलीला मैदान से प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहीं 20 बड़ी बातें

दिल्ली के रामलीला मैदान से प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकता संशोधन कानून पर न केवल केंद्र सरकार का स्टैंड साफ किया बल्कि विपक्षी पार्टियों पर अल्पसंख्यकों के बीच झूठ फैलाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि मैं जानना चाहता हूं कांग्रेस और उसके साथियों से, उसकी तरह देश को बांटने की राजनीति करने वाले दलों से कि आप क्यों देश की जनता से झूठ बोल रहे हैं, उन्हें भड़का रहे हैं। मैं उनसे जानना चाहता हूं, क्या जब हमने दिल्ली की सैकड़ों कॉलोनियों को वैध करने का काम किया तो किसी से पूछा क्या कि आपका धर्म है, आपकी आस्था किस तरफ है, आप किस पार्टी के समर्थक हैं।


पीएम मोदी ने आगे कहा कि इस बिल के पास होने के बाद कुछ राजनीतिक दल तरह-तरह की अफवाहें फैलाने में लगे हैं, लोगों को भ्रमित कर रहे हैं, भावनाओं को भड़का रहे हैं।


CAA पर PM मोदी के भाषण की 20 बड़ी बातें-


1. नागरिकता संशोधन बिल के पास होने के बाद कुछ राजनीतिक दल तरह-तरह की अफवाहें फैलाने में लगे हैं, लोगों को भ्रमित कर रहे हैं, भावनाओं को भड़का रहे हैं। ये लोग अपने स्वार्थ के लिए, अपनी राजनीति के लिए किस हद तक जा रहे हैं, ये आपने पिछले हफ्ते भी देखा है। जो बयान दिए गए, झूठे वीडियो, उकसाने वाली बातें कहीं, उच्च स्तर पर बैठे लोगों ने सोशल मीडिया में डालकर भ्रम और आग फैलाने का गुनाह किया है।


2. क्या जब हमने दिल्ली की सैकड़ों कॉलोनियों को वैध करने का काम किया, तो किसी से पूछा क्या कि आपका कौन सा धर्म है? आपकी आस्था क्या है? आप किस पार्टी के समर्थक हैं? हमने उज्ज्वला योजना के तहत जब 8 करोड़ से ज्यादा गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिये, तो क्या किसी का धर्म या जाति पूछी थी? मैं कांग्रेस और उसके साथियों से जानना चाहता हूं कि आप क्यों देश की जनता से झूठ बोल रहे हो, क्यों उन्हें भड़का रहे हो?


3. आज जो लोग कागज-कागज, सर्टिफिकेट-सर्टिफिकेट के नाम पर मुस्लिमों को भ्रमित कर रहे हैं, उन्हें ये याद रखना चाहिए कि हमने गरीबों की भलाई के लिए, योजनाओं के लाभार्थी चुनते समय कभी कागजों की बंदिशें नहीं लगाईं. स्कूल बसों पर हमले हुए, ट्रेनों पर हमले हुए, मोटर साइकिलों, गाड़ियों, साइकिलों, छोटी-छोटी दुकानों को जलाया गया है, भारत के ईमानदार टैक्सपेयर के पैसे से बनी सरकारी संपत्ति को खाक कर दिया गया है। इसके बाद इनके इरादे कैसे हैं? ये देश अब जान चुका है।


4. मैं इन लोगों से कहना चाहता हूं कि मोदी को देश की जनता ने बैठाया, ये अगर आपको पसंद नहीं है, तो आप मोदी को गाली दो, विरोध करो, मोदी का पुतला जलाओ। लेकिन देश की संपत्ति मत जलाओ, गरीब का रिक्शा मत जलाओ, गरीब की झोपड़ी मत जलाओ। पुलिस वालों को अपनी ड्यूटी निभाते हुए हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है। जिन पुलिसवालों पर ये लोग पत्थर बरसा रहे हैं, उन्हें जख्मी करके आपको क्या मिलेगा? आज़ादी के बाद 33 हजार से ज्यादा पुलिसवालों ने शांति के लिए, आपकी सुरक्षा के लिए शहादत दी है।


5. जब कोई संकट या मुश्किल आती है तो ये पुलिस न धर्म पूछती है न जाति, न ठंड देखती है न बारिश और आपकी मदद के लिए आकर खड़ी हो जाती है। ये लोग उपदेश दे रहे हैं, लेकिन शांति के लिए एक शब्द बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। इसका मतलब है कि हिंसा को, पुलिस पर हो रहे हमलों को आपकी मौन सहमति है। ये देश देख रहा है।


6. झूठ बेचने वाले, अफवाह फैलाने वाले इन लोगों को पहचानने की जरूरत है। ये 2 तरह के लोग हैं। एक वो लोग जिनकी राजनीति दशकों तक वोटबैंक पर ही टिकी रही है। दूसरे वो लोग जिनको इस राजनीति का लाभ मिला है। वोट बैंक की राजनीति करने वाले और खुद को भारत का भाग्य विधाता मानने वाले, आज जब देश की जनता द्वारा नकार दिए गए हैं, तो इन्होंने अपना पुराना हथियार निकाल लिया है- बांटों, भेद करो और राजनीतिक उल्लू सीधा करो।


7. नागरिकता संशोधन कानून भारत के किसी नागरिक के लिए, चाहे वो हिंदू हो या मुसलमान, के लिए है ही नहीं। ये संसद में बोला गया है। इस कानून का देश के अंदर रह रहे 130 करोड़ लोगों से कोई वास्ता नहीं है। कांग्रेस और उसके साथी, शहरों में रहने वाले कुछ पढ़े-लिखे अर्बन नक्सल, ये अफवाह फैला रहे हैं कि सारे मुसलमानों को डिटेंशन सेंटर में भेज दिया जाएगा। अपनी शिक्षा की कुछ तो कद्र करिए। एक बार पढ़ तो लीजिए नागरिकता संशोधन एक्ट है क्या?


8. जो इस देश की मिट्टी के मुसलमान हैं, जिनके पुरखे मां भारती की ही संतान थे, उन पर नागरिकता कानून और NRC दोनों का ही कोई लेना-देना नहीं है। ये एक्ट उन लोगों पर लागू होगा जो बरसों से भारत में ही रह रहे हैं। किसी नए शरणार्थी को इस कानून का फायदा नहीं मिलेगा। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक प्रताड़ना की वजह से आए लोगों को सुरक्षा देने के लिए ये कानून है।


9. कुछ लोग CAA को गरीबों के खिलाफ बता रहे हैं, कह रहे हैं कि जो लोग आएंगे वो यहां के गरीबों का हक छीन लेंगे। अरे झूठ फैलाने से पहले गरीबों पर तो दया करो भाई। पाकिस्तान से जो शरणार्थी आए हैं उनमें से अधिकतर दलित परिवार से हैं। वहां आज भी दलितों के साथ दुर्व्यवहार होता है। वहां बेटियों के साथ अत्याचार होता है, जबरन शादी करके उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता है।


10. ये इसलिए किया जाता है क्योंकि उनकी आस्था, पूजा पद्धति अलग है। ऐसे शोषण के कारण ही वो भारत आए और देश के अलग-अलग कोनो में रह रहे हैं। दलित राजनीति करने का दावा करने वालों से भी मैं पूछना चाहता हूं कि आप इतने वर्षों से चुप क्यों थे? आपको इन दलितों की तकलीफ कभी क्यों नहीं दिखाई दी। आज जब इन दलितों के जीवन की सबसे बड़ी चिंता दूर करने का काम मोदी सरकार कर रही है तो आपके पेट में चूहे क्यों दौड़ रहे हैं?


11. रिफ्यूजी का जीवन क्या होता है? बिना कसूर के अपने घरों से निकाल देने का दर्द क्या होता है? ये दिल्ली से बेहतर कौन समझ सकता है। यहां का कोई कोना ऐसा नहीं है, जहां बंटवारे के बाद किसी रिफ्यूजी का और बंटवारे से अल्पसंख्यक बने भारतीय का आंसू ना गिरा हो। सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट, किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं बल्कि नागरिकता देने के लिए है।


12. महात्मा गांधी ने कहा था कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू और सिख साथियों को जब लगे कि उन्हें भारत आना चाहिए तो उनका स्वागत है। ये रियायत तब की भारत की सरकार के वादे के मुताबिक है, जो बंटवारे के कारण उस समय अल्पसंख्यक बने करोड़ों भारतीयों के साथ आज से 70 साल पहले किया गया था। मनमोहन सिंह जी ने संसद में खड़े होकर कहा था कि हमें बांग्लादेश से आए उन लोगों को नागरिकता देनी चाहिए जिनका अपनी आस्था की वजह से वहां पर उत्पीड़न हो रहा है, जो वहां से भाग कर भारत आ रहे हैं।


13. आज ममता दीदी, कोलकाता से सीधे संयुक्त राष्ट्र पहुंच गई हैं, लेकिन कुछ साल पहले तक यही ममता दीदी संसद में खड़े होकर गुहार लगा रही थीं कि बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठियों को रोका जाए, वहां से आए पीड़ित शरणार्थियों की मदद की जाए। आज जिस वामपंथ को भारत की जनता नकार चुकी है, जो अब समाप्ति पर है, उसी के दिग्गज नेता प्रकाश करात ने भी धार्मिक उत्पीड़न की वजह से बांग्लादेश से आने वालों को मदद की बात कही थी।


14. आज जब इन्हीं लोगों के राजनीतिक दल, धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत आए शरणार्थियों को नागरिकता देने से मना कर रहे हैं, तो इनका असली चेहरा भी देश के लोगों के सामने आ रहा है। उस समय की हमदर्दी सिर्फ बहाना था, देश की जनता के साथ बोला गया सफ़ेद झूठ था।


15. आज जो पार्टियां यहां शोर मचा रही हैं, वो 2004 में कहां थीं जब वहां की सरकार ने कहा कि राज्य से बाहर के निवासी से शादी करने पर जम्मू-कश्मीर की बेटियों की वहां की नागरिकता खत्म हो जाएगी। क्या वो भेदभाव भारत के संविधान की स्पिरिट के अनुसार था?


16. नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वालों के हाथ में जब ईंट-पत्थर देखता हूं तो मुझे और 130 करोड़ देशवासियों को बहुत तकलीफ होती है, लेकिन जब उन्हीं में से कुछ के हाथ में तिरंगा देखता हूं, तो सुकून भी होता है। मुझे पूरा विश्वास है कि एक बार जब हाथ में तिरंगा आ जाता है तो वो फिर कभी हिंसा का, अलगाव का, बांटने की राजनीति का समर्थन नहीं कर सकता।


17. मुझे पूरा विश्वास है कि हाथ में थमा यह तिरंगा इन लोगों को हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ, हथियार उठाने वालों के खिलाफ, आतंकवादी हमले करने वालों के खिलाफ भी आवाज उठाने के लिये प्रेरित करेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि हाथ में थमा यह तिरंगा इन लोगों को पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भी आवाज उठाने के लिए प्रेरित करेगा। यही कसौटी है। तिरंगा उठाना हमारा अधिकार है लेकिन हाथों में आया तिरंगा जिम्मेदारियां भी लेकर आता है।


18. कांग्रेस और उसके सहयोगी आज इस बात से भी तिलमिलाए हुए हैं कि आखिर क्यों मोदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और खासकर मुस्लिम बहुल देशों में इतना समर्थन मिलता है। क्यों वो देश मोदी को इतना पसंद करते हैं? आज जो इस्लामिक वर्ल्ड है, हमारे जो गल्फ के देश हैं, उनके साथ भारत के संबंध मौजूदा दौर में सबसे बेहतरीन हैं। फिलिस्तीन हो, ईरान हो, सऊदी अरब हो, यूएई हो, या फिर जॉर्डन, तमाम देशों के साथ भारत के रिश्ते आज एक नई ऊंचाई को छू रहे हैं।


19. अफगानिस्तान हो या फिलिस्तीन, सऊदी अरब हो या यूएई, मालदीव हो या बहरीन - इन सब देशों ने भारत को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया है, भारत की संस्कृति के साथ अपने रिश्ते को और प्रगाढ़ करने की कोशिश की है।


20. आप आश्वस्त रहिए, इन लोगों की साजिशों के बावजूद आपका ये सेवक देश के लिए, देश की एकता के लिए, शांति और सद्भाव के लिए, मुझसे जो भी बन सकेगा, मैं कभी पीछे नहीं हटूंगा। ये लोग तो मेरे साथ आज से नहीं दो दशकों से इसी तरह का व्यवहार कर रहे हैं, अपने इसी पैटर्न पर चल रहे हैं।


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