तीन करोड़ सालाना खर्च फिर भी झील हो रही है गंदी

तीन करोड़ सालाना खर्च फिर भी झील हो रही है गंदी


रामगढ़झील में गिर रहे कचरे के शोधन के लिए जलनिगम ने 15 और 30 एमएलडी के दो एसटीपी (सिवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगे हुए हैं। जिसकी देखरेख फिलहाल जलनिगम द्वारा की जा रही है। इस पर जलनिगम हर साल करीब तीन करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। अभी तक इसके रखरखाव की जिम्मेदारी एसटीपी बनाने वाली पूणे की कंपनी पर है। अब एसटीपी के रखरखाव की जिम्मेदारी मेसर्स तोशिबा वाटर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को मिली है। जो दस वर्षों तक एसटीपी का रख रखाव करेगी।
जलनिगम फिलहाल चिड़ियाघर और आरकेबीके पास 15 और 30 एमएलडी के दो एसटीपी को संचालित कर रहा है। एसटीपी में लगी मशीनों की मरम्मत और बिजली आदि के खर्च की जिम्मेदारी फिलहाल एसटीपी का निर्माण करने वाली पूणे की एजेंसी उठा रही है। इसके लिए जलनिगम खर्च दे रहा है। रामगढ़झील को लेकर विकसित परियोजनाओं को संचालन के लिए जीडीए, नगर निगम और आवास विकास परिषद को हर साल 6.60 करोड़ रुपये देने होते हैं। पिछले चार वर्षों में जीडीए ने करीब 5 करोड़ और नगर निगम ने सवा तीन करोड़ रुपये जलनिगम को ट्रांसफर किये हैं। वहीं आवास विकास परिषद ने अभी तक एक रुपये भी नहीं दिया है। एसटीपी संचालन और अन्य परियोजनाओं के संचालन को लेकर जलनिगम पर करीब 12 करोड़ रुपये की देनदारी है।
मेसर्स तोशिबा वाटर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को दस साल के लिए रखरखाव की जिम्मेदारी मिलने के बाद जलनिगम के अफसरों ने राहत की सांस ली है। जलनिगम को फिलहाल दोनों एसटीपी को लेकर 7 से 10 लाख रुपये बिजली का बिल भुगतान करना पड़ता है। बिजली कटौती की दशा में जनरेटर से एसटीपी को संचालित किया जाता है।